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भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने आर्टेमिस II की सफलता को सराहा

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शनिवार को नासा के आर्टेमिस II चालक दल की सफल वापसी ने वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में प्रेरणा की लहर दौड़ दी है, विशेष रूप से भारत के अपने अंतरिक्ष यात्री-नामितों (Astronaut-designates) के बीच। जैसे ही ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान चंद्रमा के चारों ओर दस दिनों की रिकॉर्ड तोड़ यात्रा के बाद प्रशांत महासागर में उतरा, भारत के ‘गगनयात्रियों’ ने इसे मानव जाति के लिए एक “ऐतिहासिक मोड़” (Watershed Moment) बताया।

यह मिशन, जिसमें चार सदस्यों का विविध चालक दल शामिल था, 1972 में अपोलो कार्यक्रम की समाप्ति के बाद पहली बार इंसानों के गहरे अंतरिक्ष (Deep Space) में जाने का प्रतीक है।

चंद्र अग्रदूतों की वापसी

आर्टेमिस II कैप्सूल 11 अप्रैल, 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 05:37 बजे समुद्र में लैंड हुआ। इस मिशन ने पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर की अधिकतम दूरी तय की, जिसने पांच दशकों से अधिक समय से अपोलो 13 के चालक दल द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

यद्यपि इस मिशन में चंद्रमा पर लैंडिंग शामिल नहीं थी, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) और ओरियन यान की लाइफ-सपोर्ट प्रणालियों का परीक्षण करना था। इसकी सफलता अब आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ करती है, जिसका लक्ष्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली महिला और पहले अश्वेत व्यक्ति को उतारना है।

भारतीय ‘गगनयात्रियों’ ने जताया हर्ष

भारत के गगनयान मिशन के लिए चुने गए भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने इस सफलता पर गहरा गर्व व्यक्त किया।

  • ग्रुप कैप्टन अंगद सिंह: “यह पूरी मानवता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। इसने पुनः प्रमाणित किया है कि जब आपके पास मानवीय लचीलापन, दूरदृष्टि और बेहतरीन इंजीनियरिंग हो, तो कुछ भी असंभव नहीं है। पूरी मानवता को आर्टेमिस II की टीम पर गर्व है।”

  • एयर कमोडोर पी. बालकृष्णन नायर: उन्होंने इसे एक दार्शनिक दृष्टिकोण देते हुए कहा, “आर्टेमिस II की वापसी को ‘धरती माँ’ के गर्भ से एक नए युग के जन्म के रूप में देखा जा सकता है।”

तुलनात्मक अध्ययन: अपोलो बनाम आर्टेमिस

‘गगनयान’ और भविष्य की राह

भारत के लिए आर्टेमिस II की सफलता का समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने पहले मानव मिशन, गगनयान-1 पर काम कर रहा है। नासा के ओरियन सिस्टम की सफलता से इसरो को री-एंट्री हीट शील्ड और पैराशूट प्रणालियों के संबंध में महत्वपूर्ण डेटा मिलता है।

इसरो के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा, “आर्टेमिस II की सफलता साबित करती है कि गहरे अंतरिक्ष के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला अब परिपक्व हो चुकी है। भारत के लिए यह वह मानक (Benchmark) है जिसे हम 2040 तक भारतीय चंद्र लैंडिंग के लक्ष्य के साथ हासिल करना चाहते हैं।”

सीमाएं अब बदल गई हैं

आर्टेमिस II के चालक दल—रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन—अब मेडिकल ब्रीफिंग से गुजरेंगे। उनका डेटा वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि मानव शरीर गहरे अंतरिक्ष विकिरण (Radiation) पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। भारत के अंतरिक्ष यात्रियों का संदेश स्पष्ट है: चंद्रमा अब केवल घूमने की जगह नहीं है, बल्कि वहां बसने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

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