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उत्तराखंड राज्य महिला आयोग प्रदेश की प्रत्येक पीड़ित महिला का सशक्त कवच है- कुसुम कंडवाल

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आयोग का प्राथमिक ध्येय पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ परिवार की निजता और मर्यादा को सुरक्षित रखना- कुसुम कंडवाल

महिला आयोग किसी भी पारिवारिक या निजी विवाद को स्वयं सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित नहीं करता- कुसुम कंडवाल

देहरादून। बीते 2 दिनों से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक पारिवारिक विवाद से संबंधित प्रकरण और उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ अत्यंत भ्रामक और असत्य टिप्पणियां प्रसारित की जा रही हैं। इन टिप्पणियों में यह निराधार दावा किया गया है कि आयोग ने शिकायत प्राप्त होने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही नहीं की है। इस विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने वस्तुस्थिति स्पष्ट की है और आयोग द्वारा अब तक की गई विस्तृत वैधानिक कार्यवाही का विवरण प्रस्तुत किया है।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ऋषिकेश में घटित एक पारिवारिक प्रकरण में आयोग द्वारा शिकायत प्राप्त होते ही तत्काल संज्ञान लिया गया था। जिसमें पीड़िता द्वारा परिवार पर मारपीट व प्रापर्टी डीलिंग सहित जबरन देहव्यापार कराने सहित अन्य के आरोप लगाए थे। यह मामला 06 फरवरी 2026 को पंजीकृत किया गया, जिसके उपरांत 24 फरवरी 2026 को दोनों पक्षों को काउंसलिंग हेतु कार्यालय में आहूत किया गया था। नियत तिथि पर जहाँ शिकायतकर्ता उपस्थित रहीं, वहीं विपक्षी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण काउंसलिंग की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी। शिकायतकर्ता द्वारा रखे गए तथ्यों की गंभीरता और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, आयोग ने शिकायतकर्ता की सहमति से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून को पत्र प्रेषित कर मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के कड़े निर्देश दिए। आयोग ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि आगामी 16 अप्रैल 2026 तक विस्तृत जांच रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। वर्तमान में पुलिस द्वारा जांच प्रक्रिया गतिमान है और रिपोर्ट प्राप्त होते ही साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी परंतु यदि प्रकरण किसी भी न्यायालय के विचाराधीन होगा तो आयोग द्वारा प्रकरण में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। तब शिकायतकर्ता आयोग से जांच की प्रति अनुरोध के आधार पर ले सकती है।

​सोशल मीडिया पर हो रही आधारहीन चर्चाओं का उत्तर देते हुए अध्यक्ष ने आयोग की कार्यशैली और सिद्धांतों को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग किसी भी पारिवारिक या निजी विवाद को स्वयं सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर प्रसारित नहीं करता है। आयोग का प्राथमिक ध्येय पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ परिवार की निजता और मर्यादा को सुरक्षित रखना है, ताकि सुलह और सुधार की संभावनाएं बाधित न हों। आयोग केवल उन्हीं विशिष्ट प्रकरणों में आधिकारिक जानकारी साझा करता है जो पूर्व में ही मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो चुके होते हैं, ताकि वहां स्वतः संज्ञान की विधिक स्थिति स्पष्ट की जा सके। इसके अतिरिक्त, जब तक शिकायतकर्ता स्वयं या संबंधित पक्ष मीडिया के समक्ष अपनी बात सार्वजनिक नहीं करते, तब तक आयोग अपनी ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं करता है। किसी पक्ष द्वारा जानकारी सार्वजनिक किए जाने की स्थिति में ही आयोग अपनी प्रतिक्रिया और की गई कार्यवाही का विवरण आधिकारिक तौर पर प्रस्तुत करता है।

​अंत में आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग प्रदेश की प्रत्येक पीड़ित महिला का सशक्त कवच है और हम सदैव विधिक प्रक्रिया एवं साक्ष्यों के आधार पर कार्य करते हैं। किसी भी गंभीर प्रकरण में बिना पूर्ण जांच रिपोर्ट के एकपक्षीय कार्यवाही करना न्यायसंगत नहीं है। जो तत्व बिना तथ्यों की जानकारी के सोशल मीडिया पर आयोग की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं, वे वास्तव में विधिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। आयोग समस्त नागरिकों से अपील करता है कि अर्ध-सत्यों और भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें।

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