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उत्तराखंड सरकार ने प्रतिनियुक्ति सेवा स्थानांतरण और बाह्य सेवा में कार्मिकों की तैनाती को लेकर बनाए नए नियम

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उत्तराखंड सरकार ने प्रतिनियुक्ति सेवा स्थानांतरण और बाह्य सेवा में कार्मिकों की तैनाती को लेकर नए नियम बनाए हैं। अब अधिकतम पांच वर्ष ही प्रतिनियुक्ति मिलेगी और उसके बाद पांच वर्ष का कूलिंग पीरियड होगा। इस दौरान संबंधित कर्मचारी दोबारा आवेदन कर सकता है लेकिन निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति लेगी। किसी भी कार्मिक को सेवाकाल में अधिकतम दो बार ही यह सुविधा मिलेगी।

किसी भी कार्मिक को सेवाकाल में अधिकतम दो बार ही यह सुविधा मिलेगी। प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद मूल विभाग में लौटने से कन्नी काटी तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा, उच्च शिक्षा, अभियांत्रिकी सेवाओं समेत विभिन्न विभागों के कार्मिक प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं। यह स्थिति तब है, जब मूल विभाग स्वयं कार्मिकों की कमी से जूझ रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनियुक्ति के साथ ही बाह्य सेवा और सेवा स्थानांतरण के माध्यम से मूल विभाग से अन्यत्र कार्मिकों की तैनाती पर नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर तैनाती की व्यवस्था को हतोत्साहित करने के निर्देश दिए थे।

इस क्रम में वित्त सचिव वी षणमुगम ने समस्त प्रमुख सचिवों, सचिवों एवं प्रभारी सचिवों के साथ मंडलायुक्तों, विभागाध्यक्षों एवं कार्यालयाध्यक्षों को मंगलवार को आदेश जारी किया है। आदेश में प्रतिनियुक्ति, बाह्य सेवा और सेवा स्थानांतरण की परिभाषाओं को स्पष्ट करने के साथ ही इन माध्यम से तैनाती को लेकर नियम कड़े किए गए हैं।

अब इनके माध्यम से सामान्य तैनाती तीन वर्ष होगी। इसे दो वर्षों के लिए वित्त विभाग की सहमति से बढ़ाया जा सकता है। यह अवधि अधिकतम पांच वर्ष होगी और इसे अब किसी भी दशा में आगे विस्तारित नहीं किया जाएगा।

प्रतिनियुक्ति पूरी करने के बाद पांच वर्ष की अवधि कूलिंग पीरियड होगी। इसके पूरा होने के बाद ही प्रतिनियुक्ति, बाह्य सेवा और सेवा स्थानांतरण के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव की समिति निर्णय लेगी। समिति में कार्मिक, वित्त, कर्मचारी के पैतृक विभाग और प्रतिनियुक्ति से संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव या सचिव बतौर सदस्य सम्मिलित हैं।

बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं में तैनात कार्मिकों के लिए अधिकतम पांच वर्ष की सामान्य सीमा लागू नहीं होगी, लेकिन समय अवधि विस्तारित करने के लिए मुख्य सचिव की समिति से अनुमोदन लिया जाएगा। जिन कार्मिकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष का समय शेष रह गया है, उन्हें प्रतिनियुक्ति, बाह्य सेवा एवं सेवा स्थानांतरण का लाभ नहीं मिलेगा।

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