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घेरबाड़ योजना से सुरक्षित हुई फसलें, 339 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिला संरक्षण

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जंगली जानवरों से खेतों की सुरक्षा, घेरबाड़ से पहाड़ों में कृषि को मिला नया जीवन

घेरबाड़ से किसानों का बढ़ रहा आत्मविश्वास; भविष्य में और क्षेत्रों में होगा विस्तार

पौड़ी- पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान से परेशान किसानों के लिए कृषि विभाग की घेरबाड़ योजना एक प्रभावी समाधान बनकर सामने आयी है। जिला योजना के अंतर्गत जनपद के विभिन्न विकासखंडों में कराए गए घेरबाड़ (फेंसिंग) कार्य से अब बड़ी संख्या में किसानों की कृषि भूमि सुरक्षित हो गयी है। इससे किसानों को अपनी मेहनत से तैयार फसलों को बचाने में राहत मिली है और खेती के प्रति उनका उत्साह भी बढ़ा है।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के तहत कृषि विभाग द्वारा जनपद में कुल 102 परियोजनाओं के माध्यम से घेरबाड़ का कार्य कराया गया। इन परियोजनाओं के लिए कुल 339 लाख रुपये की स्वीकृत लागत निर्धारित की गयी, जिसके तहत चयनित गांवों में खेतों के चारों ओर मजबूत घेरबाड़ करायी गयी। इस योजना के माध्यम से कुल 339 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुरक्षित किया गया है।

प्रभारी कृषि अधिकारी मनविंदर कौर ने बताया कि घेरबाड़ का कार्य जनपद के एकेश्वर, जयहरीखाल, पोखड़ा, थलीसैंण, खिर्सू, पाबौ, रिखणीखाल, नैनीडांडा, बीरोंखाल, पौड़ी, कोट, कल्जीखाल, दुगड्डा, द्वारीखाल और यमकेश्वर विकासखंडों के चयनित गांवों में कराया गया। अधिकांश परियोजनाओं में लगभग 3 से 6 लाख रुपये तक की लागत से खेतों के चारों ओर मजबूत फेंसिंग की गयी है, जिससे किसानों की फसलों को जंगली सूअर, बंदर तथा अन्य वन्यजीवों से होने वाले नुकसान से काफी हद तक बचाया जा सके। पहले जहां किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए दिन-रात खेतों की निगरानी करनी पड़ती थी, वहीं अब घेरबाड़ होने से उन्हें काफी राहत मिली है।

बीरोंखाल विकासखंड के ग्राम नौगांव की सुशीला देवी, बिक्रम सिंह, जयपाल सिंह और नरेंद्र सिंह सहित अन्य किसानों ने बताया कि 130 मीटर लंबी घेरबाड़ से जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा हुई है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। इस घेरबाड़ के दायरे में लगभग 80 खेत शामिल हैं। अन्य विकासखंडों में भी किसानों ने इस पहल के लिए कृषि विभाग की सराहना की है।

जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने बताया कि जनपद के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगली जानवरों के कारण किसानों की फसलों को लगातार नुकसान हो रहा था। इस समस्या के समाधान हेतु जिला योजना के अंतर्गत चयनित गांवों में प्राथमिकता के आधार पर घेरबाड़ का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां घेरबाड़ का कार्य पूरा हो चुका है, वहां किसानों की कृषि भूमि अब अधिक सुरक्षित हो गई है और फसलों को लेकर उनकी चिंता में कमी आयी है। इससे किसान अधिक आत्मविश्वास के साथ खेती कर पा रहे हैं तथा कृषि उत्पादन में भी वृद्धि की संभावना बढ़ी है। उन्होंने ने कहा कि भविष्य में भी किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अन्य क्षेत्रों में घेरबाड़ के कार्य कराए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके और खेती को सुरक्षित एवं लाभकारी बनाया जा सके।

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