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युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले? जानें कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

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अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खानपान के चलते दिल का दौरा किसी को भी पड़ सकता है, लेकिन हार्ट अटैक की रोकथाम आपके कंट्रोल में हो सकती है। आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ हार्ट से जुड़ी समस्या या फिर हार्ट अटैक का खतरा अधिक रहता है, लेकिन आज के समय में युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। युवाओं में हार्ट अटैक का सबसे महत्वपूर्ण कारण लाइफस्टाइल है। हालांकि, दिल के दौरे के कई कारण होते हैं। इसका जोखिम कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल बहुत ही आवश्यक है। आइये जानते हैं  युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले?

अब हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही…”
आज के दौर में 24 से 45 वर्ष की उम्र के युवा भी हार्ट अटैक जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। डॉक्टरों की मानें तो ये आंकड़े तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है गलत जीवनशैली।

मेडिकल रिपोर्ट क्या कहती है?
एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में हुए:

400 एंजियोग्राफी

175 एंजियोप्लास्टी

25 पेसमेकर सर्जरी में से लगभग 20% मरीज 30 से 45 वर्ष के बीच के थे।
सबसे कम उम्र का हृदय रोगी 24 साल का था।

युवाओं में हार्ट अटैक के प्रमुख कारण:

कम नींद और मोबाइल की लत
देर रात तक स्क्रीन देखना, तकिए के पास मोबाइल रखना, बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना – ये सब नींद की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं।

तनाव और अत्यधिक वर्कलोड
नौकरी का प्रेशर, निजी जीवन में असंतुलन और बिना ब्रेक के काम करना मानसिक और शारीरिक थकावट ला रहा है।

धूम्रपान और शराब का सेवन
यह दिल की धमनियों को कमजोर बनाता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ाता है।

फिटनेस की कमी और फास्ट फूड का सेवन
शारीरिक गतिविधि की कमी और तेल-मसाले वाले खाने से धमनियों में वसा जम जाती है, जिससे ब्लॉकेज हो जाती है।

हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज
ये सभी फैक्टर हार्ट के लिए बेहद खतरनाक हैं और बिना लक्षण के धीरे-धीरे दिल को नुकसान पहुंचाते हैं।

  • हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय:
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें
    7-8 घंटे की गहरी नींद जरूर लें
    मोबाइल का उपयोग सोने से कम से कम 1 घंटे पहले बंद करें
    धूम्रपान और शराब से पूरी तरह बचें
    घर का बना संतुलित आहार लें
    समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं
    हर 6 महीने में हार्ट चेकअप करवाएं (विशेषकर अगर परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है)

(साभार)

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