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पीएम मोदी ने मन की बात में देशवासियों को दी त्योहारों की शुभकामनाएं

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छठ महापर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज की एकता का प्रतीक- पीएम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने इस अवसर पर त्योहारों की शुभकामनाएं दीं और विशेष रूप से छठ महापर्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह पर्व संस्कृति, प्रकृति और समाज के बीच गहरी एकता का प्रतीक है। छठ के घाटों पर समाज का हर वर्ग एक साथ खड़ा होता है, जो भारत की सामाजिक एकता का सुंदर उदाहरण है।

पर्यावरण और स्वच्छता में पहल
पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में चल रही उल्लेखनीय पहलों का भी जिक्र किया। उन्होंने अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में ‘गारबेज कैफे’ की बात की, जहां लोग प्लास्टिक कचरा लाकर मुफ्त भोजन प्राप्त कर सकते हैं। एक किलो प्लास्टिक पर दोपहर या रात का खाना और आधा किलो पर नाश्ता मिलता है।

बंगलूरू में इंजीनियर कपिल शर्मा की पहल का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि उनकी टीम ने शहर की 40 झीलों और कुओं को पुनर्जीवित किया। इस अभियान में स्थानीय लोग और कॉरपोरेट्स भी शामिल हैं, जिससे शहर का पर्यावरण बेहतर हुआ है।

मैनग्रोव से पर्यावरण संरक्षण
गुजरात के धोलेरा तट पर मैनग्रोव लगाने की पहल के बारे में पीएम मोदी ने बताया कि पांच साल पहले शुरू किए गए इस अभियान से 3,500 हेक्टेयर में मैनग्रोव फैल गए हैं, जिससे डॉल्फिन, केकड़े, जलीय जीव और प्रवासी पक्षी बढ़े हैं। इससे मछुआरों को भी लाभ मिला है।

सरदार पटेल की जयंती पर रन फॉर यूनिटी में शामिल होने की अपील
प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की आधुनिक भारत में भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पटेल ने स्वच्छता, सुशासन और देश की एकता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि 31 अक्तूबर को सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित रन फॉर यूनिटी में शामिल हों।

कोरापुट कॉफी और कृषि विकास
पीएम मोदी ने ओड़िशा के कोरापुट में कॉफी खेती की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत की कॉफी दुनिया-भर में लोकप्रिय हो रही है। उन्होंने देश के विभिन्न कॉफी उत्पादक क्षेत्रों जैसे कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पूर्वोत्तर का भी उल्लेख किया और बताया कि लोग जुनून और मेहनत से कॉफी की खेती कर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं।

निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक एकता और किसान-उद्योग की पहल को उजागर करता है। उन्होंने देशवासियों को प्रेरित किया कि वे इन पहलों में सक्रिय रूप से भाग लें और जिम्मेदारी निभाएं।

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