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हिमाचल के बाद उत्तराखंड में भी 2 जनवरी तक 24 घंटे खुले रहेंगे होटल और रेस्टोरेंट

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देहरादून: हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तराखंड में भी शुक्रवार से दो जनवरी तक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, चाय व खान-पान की दुकानें और बार 24 घंटे खुले रहेंगे। नए साल के स्वागत और पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत शासन ने यह कदम उठाया है।

नए साल के स्वागत के लिए पर्यटकों के उत्तराखंड की वादियों में उमडऩे की संभावना है। इसे देखते हुए सरकार भी पर्यटकों की सुविधा के दृष्टिगत सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी मे अपर सचिव पर्यटन सी रविशंकर ने आदेश जारी कर शुक्रवार से दो जनवरी तक राज्य के सभी होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, चाय व खान-पान की अन्य दुकानें 24 घंटे खुला रखने की अनुमति जारी की है।

साथ ही कहा है कि इसके सभी को सुसंगत नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। उधर, सचिव आबकारी एचसी सेमवाल ने बताया कि राज्य में सभी बार और होटल के बार भी दो जनवरी तक 24 घंटे खुले रहेंगे।

नववर्ष के जश्न की तैयारियों ने उड़ाई वन विभाग की नींद

पुराने साल की विदाई और नए साल के स्वागत के लिए वन क्षेत्रों के आसपास के होटल, रिसार्ट व वन विश्राम गृहों में चल रही तैयारियों ने वन विभाग की नींद उड़ाई हुई है। चिंता इस बात की है कि जश्न के माहौल में वन्यजीवों की जान सांसत में रहेगी। साथ ही यदि कोई जंगल के भीतर जा धमके और पेड़ों पर आरी चल गई तो…।

यद्यपि, विभाग का दावा है कि किसी भी स्थिति से निबटने के लिए उसकी तैयारी पूरी है। वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल के अनुसार सभी क्षेत्रों में गश्त की जा रही है।

गाइडलाइन का अनुपालन कराने के निर्देश

वन विश्राम गृह, होटल, रिसार्ट पर नजर रखी जा रही है। पर्यटकों के लिए तय गाइडलाइन का अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। सैलानियों से भी आग्रह किया गया है कि वे जश्न के दौरान ऐसा कोई कदम न उठाएं, जिससे वन्यजीवन में खलल पड़े।

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत राज्य में स्थिति नियंत्रण में होने के बाद अन्य प्रदेशों से बड़ी संख्या में सैलानियों ने उत्तराखंड का रुख किया। नववर्ष के स्वागत के लिए भी पर्यटकों के यहां पहुंचने का क्रम शुरू हो गया है। वन विश्राम गृहों के साथ ही संरक्षित व आरक्षित वन क्षेत्रों से लगे होटल, रिसार्ट आदि अभी से बुक हो चुके हैं।

कई होटल, रिसार्ट में तो नववर्ष के जश्न की तैयारियां भी प्रारंभ हो चुकी हैं। इससे वन विभाग के अधिकारियों की पेशानी पर बल पड़े हैं। यह बेवजह भी नहीं है।

यदि जश्न की आड़ में कोई जंगल में पहुंचकर वन एवं वन्यजीवों के लिए खतरा बन जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इसे देखते हुए वन विभाग ने फील्ड कर्मियों की छुट्टियां पहले ही रद कर दी हैं। निरंतर गश्त हो रही है। राज्य से लगी सीमाओं पर चौकसी तेज की गई है, लेकिन चिंता अपनी जगह कायम है।

वन विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक सिंघल के अनुसार जश्न के दौरान वन एवं वन्यजीवों पर कोई आंच न आए, इसके लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

पर्यटकों से भी आग्रह किया गया है कि वे जश्न मनाएं, लेकिन तय मानकों से अधिक शोर वन क्षेत्रों के नजदीकी होटल, रिसार्ट में न करें। उन्होंने बताया कि वन विश्राम गृह, होटल, रिसार्ट पर वन कर्मी निगाह रख रहे हैं। यदि कहीं नियमों की अनदेखी होती है तो ऐसे मामलों में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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